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Showing posts from April, 2021

मौन की रेखायें : मानव कौल

आदतन... अपना भविष्य मैं अपने हाथों की रेखाओं में टटोलता हूँ। 'कहीं कुछ छुपा हुआ है'- एक ऐसा चमत्कार, एक छोटे बादल जैसा हमेशा मेरे साथ चलता है। तेज़ धूप में इस बादल से हमें कोई सहायता नहीं मिलती है। वो बस हथेली में एक तिल की तरह, पड़ा रहता है। अब तिल का होना शुभ है, और इससे लाभ होगा.. इसलिए इस छोटे से बादल को संभालकर रखता हूँ। फिर इच्छा होती है, कि वहाँ चला जाऊँ... जहाँ बारिश पैदा होती है, बादल बट रहे होते हैं। पर शायद देर हो चुकी है, अब मेरी आस्था का अंगूठा इतना कड़क हो चुका है, कि वो किसी के विश्वास में झुकता ही नहीं है। फिर मैं उन रेखाओं के बारे में भी सोचता हूँ... जो बीच में ही कहीं ग़ायब हो गई थी। 'ये एक दिन मेरी नियति जीयेगा'- की आशा में... जो बहुत समय तक मेरी हथेली में पड़ी रहीं। क्या थी उनकी नियती? कौन सी दुनिया इंतज़ार कर रही है, इन दरवाज़ों के उस तरफ़, जिन्हें मैं कभी खोल नहीं पाया...। तभी मैंने एक अजीब सी चीज़ देखी, मैंने देखा मेरे माथे पर कुछ रेखाएँ बढ गयी हैं....अचानक,  अब ये रेखाएँ क्या हैं...क्या इनकी भी कोई नियति है, अपने दरवाज़े हैं? नहीं...इनका कुछ भी नहीं है, बह...

देश कागज़ पर बना नक्शा नहीं होता: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

  यदि तुम्हारे घर के  एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम   दूसरे कमरे में सो सकते हो? यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रहीं हों तो क्या तुम   दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो? यदि हाँ तो मुझे तुम से   कुछ नहीं कहना है। देश कागज पर बना   नक्शा नहीं होता कि एक हिस्से के फट जाने पर बाकी हिस्से उसी तरह साबुत बने रहें और नदियां, पर्वत, शहर, गांव वैसे ही अपनी-अपनी जगह दिखें अनमने रहें। यदि तुम यह नहीं मानते तो मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहना है। इस दुनिया में आदमी की जान से बड़ा कुछ भी नहीं है न ईश्वर न ज्ञान न चुनाव कागज पर लिखी कोई भी इबारत फाड़ी जा सकती है और जमीन की सात परतों के भीतर गाड़ी जा सकती है। जो विवेक   खड़ा हो लाशों को टेक वह अंधा है जो शासन   चल रहा हो बंदूक की नली से हत्यारों का धंधा है यदि तुम यह नहीं मानते तो मुझे अब एक क्षण भी   तुम्हें नहीं सहना है। याद रखो एक बच्चे की हत्या एक औरत की मौत एक आदमी का गोलियों से चिथड़ा तन किसी शासन का ही नहीं सम्पूर्ण राष्ट्र का है पतन। ऐसा खून बहकर   धरती में जज्ब नहीं होता आकाश में फह...