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आने वालों से कहो हम तो गुज़र जायेंगे/ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम मुसाफिर युँही मसरूफे सफर जायेंगे,
बेनिशाँ हो गए जब शहर तो घर जायेंगे

किस कदर होगा यहाँ मेहर-ओ-वफा का मातम
हम तेरी याद से जिस रोज़ उतर जायेंगे

जौहरी बंद किये जाते हैं बाज़ारे-सुखन,
हम किसे बेचने अलमास-ओ-गुहर जायेंगे

शायद अपना ही कोई बैत, हुदी-खवाँ बनकर
साथ जायेगा मेरे यार जिधर जायेंगे

"फैज़" आते हैं राहे-इशक में जो सखत मकाम,
आने वालों से कहो हम तो गुज़र जायेंगे...........

  1. मेहर-ओ-वफा - मुहबबत और वफा
  2. बाज़ारे-सुखन - शायरी का बाज़ार
  3. अलमास-ओ-गुहर - कीमती पथतर
  4. बैत - शेयर या दोहा
  5. हुदी-खवाँ - गाने वाला राहगीर

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